Jiske kaan ho wo sunle

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जिसके कान हो वो सुंले, जिसकी आँख हो देख ले वो

बोनेवाला, बीज बोने चला -4


कुछ दाने राहों पे गिरे, और कुछ परिंदों ने चग लिए

कुछ पथरीली ज़मीन पे गिरके, मिट्टी ना मिली बढ़ ना सके

और जो गिरे जुंगली झाड़ों पर, उनके तले डब के रह गये

जिसके कान हो वो सुंले


अची ज़मीन पर कुछ गिरे, बढ़ने लगे फलने लगे

कुछ सौ गुना फल ले आए, साथ गुना कुछ टीस गुना

जिसके कान हो वो सुंले…


उसके कलाम को सुनते हो, सुनते हो तो समझो भी

दिल में वो बोया बीज है जो, उसको ज़रा तुम सींचो भी

मानते हो तो दिल में रखो, और जो वो कहता है वो करो

जिसके कान हो वो सुंले…

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